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मुर्शद..

हाये मुर्शद...
मशरूफ तो सभी थे अपनी-अपनी जिन्दगी में
...
मुर्शद
पर आज भी तुम्हारी याद हमे तडपा ही जाती है....
komalsoni ✍
©komalsoni