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"मुसाफ़िर "🙏🙏🙏

हम तो है वही मुसाफ़िर,
जो राहो से गुज़रते है।
नयी सोच नयी उमंग से,
सच्चा राह दिखलाते है।
मागँ कठिन हो या सरल,
हंसकर पार कर लेते है।
कई राही भी बनते है अपने पंथ के,
कई मागँ भी बदल लेते है।
"संकेत " हमें खुदा संभालता,
हम राही खुद बन जाते है ➕
डाँ. माला चुडासमा "संकेत "
©dr.mala