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मुश्किलों से भरे ✍

मुश्किलों से भरे तो मेरे
राह भी थे, पर मैं ने हार
नहीं माना,
बेड़ीया तो मेरे पैरों में भी
थी,पर मैं ने फिर भी उड़ने
की कोशिश की,
रोकना तो लोगों ने भी चाहा,
पर मैं ने खुद की सुनी,
एक दिन में मैं, (रामजी सकपाल)
से भीमराव अम्बेडकर नहीं
बना ,सालों मैं ने मेहनत किया,
भारत के सविंधान को लिखना
आसान नहीं था, पर इंसान
चाहे तो क्या नहीं कर सकता
इस बात को मैं ने कर के दिखाया
मुश्किलों से भरे तो मेरे
राह भी थे॥
©banirai