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मुस्कान

हर उदासी की मुस्कान हो तुम
हर कहानी के किरदार हो तुम
विदा कर गए जो अपने शहर को
कौन लगाए उम्मीद अब शहर से
जिस शहर की कोई सांझ नहीं
उस प्रभात की डोर बिखर चुकी ।
©anusingh