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मुस्कान

एक मुस्कान इन होठो पर हो,
तो दुनिया कितनी हसीन बन जाती है।
कुछ सपने सच ना भी हो,
तो भी ये आँखें जाने कितने सपने संजोती है।
सब मिथ्या है,
ये जानकर भी,
हम जीवन को सच मानकर ही तो जीते हैं।
अपने अलबेलो से रंग में,
अपनी एक अलग दुनिया सजाए बैठे हैं।
फर्क तो बस हमारी नज़र का है,
बस इस नज़रिए को बदल लेने से ही,
हमें सादगी में अपार सुंदरता दिखने लगती है।
कुछ ना भी हो तो भी,
बहुत कुछ का एहसास कराती है।
एक मुस्कान के आते ही,
सारी दुनिया हसीन नज़र आती है।
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