मत करो बिते बातों का बखान.
नहीं तो रहोगे अंदर से परेशान.
अगर फिर से लाना है वही मुस्कान.
छोड़ दो पाने कि चाहत, दुसरो से मान, सम्मान.
और विते हुए दिनों का अपमान.
अगर फिर से लाना है वही मुस्कान.
कड़वा अनुभवों को भुलाकर, दो दिलो को मिलाकर.
करे आपस में एक दूसरे का सम्मान.
अगर फिर से लाना है वही मुस्कान.
दिल में दबी दर्द को दफना कर, कर ले गंगा स्नान.
अगर फिर से लाना है वही मुस्कान.
भुतकाल को भुल, हो जाये वरतमान में मशगूल.
भविष्य को करे उसका आने पे सम्मान.
अगर फिर से लाना है वही मुस्कान.
अमरेन्द्र कुमार
©amrendraku
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