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मूझे नही आता....!

मूझे जो नही सूझता, वह तू मूझे सिखा दे
मैं गिरने के बाद, उठना नही आता.....
आज के कुकर्म ना भविष्य मे हो दूबारा
तेरे राह पर चलकर, लढना नही आता....
मूझ मे ना हूँ मैं तूझ जैसा
तेरे लब्जों की बात करना नही आता....
सिखा दे मेरी ऊँची आवाज को तू
मैं जभी भी देखू, तेरे नजर से देखू
तूझमे होकर देखू या फिर चुप रहूँ ।
हर किसी को खुश रख सकू
वो तरीका अपना ना नही आता.....
जो मैं नही हूँ वैसे दिखाने का
वो सलीका नही आता....
दिल मे कुछ और जूबा पे कुछ और
ये बाजीगीरी का कमाल नही आता...
हे प्रभू बस इतनी सी इनायत करना
जीसके भी पास जाऊँ, तूझमे होकर जाऊँ
तेरे जैसा सहूँ या फिर चूप रहूँ ।
©sunil
©jesuslove