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न है आरज़ू न ही कोई वहम।

न है आरज़ू न ही कोई वहम।

ऐसा नहीं कि मुझे नहीं कोई ग़म

मगर ये आंखें न होंगी कभी अब नम

किसी खुशी की न होगी खुशी

अब न किसी के छुटने का होगा ग़म

चंद कांसो से तौलने वाले देख मुझे

मेरे वज़न का नहीं है कोई तेरे पास रकम

मेरी मिल्कियत है बस दो ग़ज जमीं

न है आरज़ू न ही कोई वहम

मौत अगरचे मौत हैं अनुराग तो

ये ज़िन्दगी भी मौत से नहीं है कम।