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न जाने कितनी बार......

वक्त लगता है हालातो़ से निकलने में वरना
गुजर जाते न जाने ........
हम भी कितनी बार .......
इतना आसां अगर होता इश्क़ करना तो
कर जाते न जाने........
हम भी कितनी बार.......
फर्क कुछ पड़ता अगर झूठी कसमो से
तो मर जाते न जाने ......
हम भी कितनी बार........
खैरीयत हुई के नींद आ गई मुझे
वरना नज़र आते तूम.......
न जाने कितनी बार.......
तू मुझे मश़वरा देता रहता
हद मे रहने से की....
और हम हद से गुजर जाते
न जाने कितनी बार........
©akkshat28