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न जाने वो जज़बात वो लम्हें वो यादें सब किधर गए।

न जाने वो जज़बात वो लम्हें वो यादें सब किधर गए।

न जाने वो जज़बात वो लम्हें वो यादें सब किधर गए

बहुत बड़ा शहर था तेरा हम बाइपास से गुजर गए

जब तुम्हें उदासी बेचैनी ग़म ये सब कभी कहीं मिले

मेरे घर का रास्ता दिखा देना और कहना वो उधर गए

मैं ये ख़त उनको भेजना चाहता था वहां डाकिया ही नहीं जाता

ऐ खुदा ज़रा ऊनको तू ही बता दे कि वो अब सुधर गए

अब मुझे किसी तुफान किसी ज़लज़ले से डर नहीं लगता

आदत हो गई है वर्षों से सर से छत जो है उजड़ गए

किस किस से कब तक लगाएं रखोगे तुम आश अनुराग

देखो जो अपने थे वो तो कब के हैं मुकर गए।