कश्तियां डूब जाती है, एक मकान बनानें में,
बेटा बाप से कहता है हमारे लिए किया ही क्या है ।
उम्र गुजर जाती है बाप की बेटे को शिखर तक लाने में, बेटा बाप से कहता है, हमें दिया ही क्या है ।
खुद की झोली खाली कर ,बेटे की पोटली भर देता है, बेटा बाप से कहता हमें मिला ही क्या है।
खुद की तलाश में निकलो तो पता चले जिन्दगी क्या है, उस बाप ने दिया क्या है ,वो बाप क्या है ।
©sgupta
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