D divya jyot en July 23, 2025 नादानीयाँ जरा सी धूप में कराह उठती थी वो, अब तो धूप की कराह से जरा सा भी भय नही, पता नही मौसम शिथिल पड़ गए हो या सहने की झमता बढ़ गये हैं।। ©divya jyoti