तू महाकाली तू कल्याणी तू सृष्टि का आधार है
तू संयम तू सब्रम तुझमें बसा सकल संसार है
तू रूपांजलि तू गीतांजलि हे नारी तू कहां लाचार है
आंखों में ज्वाला हो तो मुंड काटने निकल पड़े
एक हाथ कटार लिए खप्पर भरने निकल पड़े
स्नेह संस्कृति संस्कार समेट तू सृष्टि चालिका है
तू पावन पर्व तू संसार पालिका है
धन की देवी लक्ष्मी , सरस्वती विद्या दायत्री
शक्ति है स्वयं श्री मालिके से तू खुद अवतार है
तू शुभांगी तू शिवांगी है नारी तू कहां लाचार है
अंधेरे से मत डर तू सोना है तप कर और निखर
स्वाति कि तू बूंद है तू केवल शिप में बिखर
नोच ले हर नजर जो तेरी तरफ उठे
हर बार तू ही क्यों इस बार जो गलत वो झुके
खामोश सड़कों पर कदम रुकनी नहीं चाहिए
हाथ उठे जो तेरे आबरू पर ,सर वह शरीर पर रहनी नहीं चाहिए
ऐसे ही झुकती रही सियासत कातिल के दरबारों में
तुम्हें ही धार भरनी होगी अपनी इन तलवारों में
तुझमें भगवती, तू भावनी, तू प्रज्ञा प्रकाश है
तू स्वयं आराधना की मूरत, हे नारी! तू कहां लाचार है। :- krishna kashyap insta id:- ___krishna___2509
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