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नासमझ

मेरा तुझे देख कर अपनी दुनिया भूल जाना,
तुझे खोने के ख्याल से भी डर जाना,
तुझमे खो कर हम खुदको पाते थे,
हाँ हम नासमझ थे ।।
तेरा तेरे हर वादे से मुकर जाना,
मेरा फिर भी तेरे साथ को बनाये रखना,
तेरे हर झूठ को भी सच मान लेते थे,
हाँ हम नासमझ थे ।।
©gulshan