तुम्हारे से कोई रिश्ता
कहां मालूम हुआ मुझको
मगर इतने से ही मेरी रूहें
अब मुसकुराती हैं
निकलकर दूर अब तो
जा ही बैठे हो शिवाले से
यहां की आरती में
नये दीये झिलमिलाते हैं
जरा देखो वहां से
कोई तो होगा झरोखा भी
मैं तुमको याद करके रोज
अपना दिन बनाता हूं
तुमको जान भी पाया नहीं
तुम दूर जा बैठे
तुम्हारी याद में अक्सर
मैं अब भी डूब जाता हूं
@ उमाशंकर 🌷
©yogamity
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