नैनों से मैं बात करना जानू रे
होठों की सौगात मैं पढना जानू रे।
तेरे दिल की बात समझना जानू रे
इश्क़ की मिठी बात करना जानू रे।
तू तो हैं एक पड़ियों की रानी
सपनों में तेरे साथ चलना जानू रे।
इस नयन को दुजा नजर नहीं आवे
तेरे नयन में भी मै,बसना जानू रे।
सात समन्दर पार चाहे दुर चली जा
तेरी तरह मैं भी तैरना जानू रे।
प्रेम का ये बंधन,कचे धागे की ये डोर
तेरे लिए तो मैं,सिर्फ मरना जानू रे।
कितना पावन जिवन,हो मधूर मिलन
तेरे बिना संग मन,तड़पना जानू रे।
जैसे तेरी बदन,हो एक फुलों का उपवन
ओढ़ के तेरी यौवन,मैं महकना जानू रे।
©anuragrahi
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