रंगों की सारी रंगत तो दिखा दे
हो गया हु खुद से ही दूर कोई
मुझे मुझ से तो मिला दे
साथी की मुझे संगत तो दिखा दे
कोई हूर की परी की चाहत नही मेरी
जादा अच्छी नहीं थोड़ी कमबख्त ही बता दे
शराब भी पीता हूं तो सारी यादें ताजा हो जाती है
कोई तो ऐसा ज़हर बता दो जो मेरी सारी यादें मिटा दे
ले ले मुझ से मेरी जवानी वापस ए खुदा
और मुझे मेरा बचपन लौटा दे
तकलीफ बड़ी होती है अब तो जीने में
©deepakshar
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