K kumarsonu en July 23, 2025 निखार 🤗🤗 आहिस्ता आहिस्ता गुज़र रही हैजिंदगीकुछ सपने टूटे जज्बात बिखरे हैं मगरकुछ खोकर पाकर संवर रही हैजिंदगीयूं तो ठोकर खाकर गिरे बहुत हैमगरगिरकर संभलकर निखर रही हैजिंदगी....- 🤗🤗🤗🤗🤗©kumarsonu