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नितिश भैया काहे हमरो देखवलऽ जेलखानवा हो।

जेलखाने के बा बुरा रवैया कोई किसी का यार नहीं
आंटा गुँथे के बा बड़ा मुसीबत बेंत से इंकार नहीं।
जब कैदी चिल्लैहे बिमार बिमार डॉक्टर का जबाव नहीं
कंपाउंडर को दिए रूपैया तो भर्ती से इंकार नहीं।
तोहरो जियलऽ से बेहतर मरनवा हो नितिश भैया
काहे तू हमरा के जेलखानवा देखवलऽ हो।
जौने-जौने कहलऽ मननी कहनवा टरनी न तोहर जबानवा
भरी-भरी चिलम गांजा पिऽवनी खिऽवनी चीनी में मखनवा
नितिश भैया काहे हमरो देखवलऽ जेलखानवा हो।
करवा के अंदर-बाहर गिनती तब चलनी पैखनवा
मुंह-हाथ धो के फाइल पर बैठनी मिले उंहा मिठा-चनवा
नितिश भैया काहे हमरो देखवलऽ जेलखानवा हो।
आरा देखनी बलिया देखनी देखनी पटना कैदखानवा
भागलपुर के भी जेहल देखनी कैदी पर तनल रहे निशानावा
नितिश भैया काहे हमरो देखवलऽ जेलखानवा हो।
गंजी डोरीया पैंट डोरीया गमछा मिलेला चारखानवा
थरूईन के लेके तू सुतेलऽ जैसे हवे तोहर जनननवा
नितिश भैया का इ कहे खातिर हमरो देखवलऽ जेलखानवा हो।
यह रचना मेरी अपनी नहीं है बल्कि एक बुजुर्ग अपने शब्दों में नितीश जी के उपर तंज कसते हुए अपने अनुभव को साझा किया है।
©anuragrahi