S

नज़ारे यूं तो हजारों तेरे दयार में थे।

नज़ारे यूं तो हजारों तेरे दयार में थे
इक तू ही हो परेशां हम जिसके प्यार में थे।
तुमने तो घर से निकलना छोड़ ही दिया था
और हम हर रोज़ खड़े राह-ए-दिदार में थे।
सच पुंछो तो उस जुदाई का हमें कुछ मलाल नहीं
इस वस्ल से कहीं ज्यादा मजा इंतजार में थे।
सावनी अंधों को हर चीज़ सब्ज नज़र आता
उसी तरह डुबे हुए हम तेरे हुस्न की खुमार में थे।
ये हुस्नपरस्ती ये नुक्ताचीनी सब छोड़ दी हमने
संग जिने संग मरने की वो बातें सब बेकार में थे।
तकाजा वक्त की है दो दिल मिलकर भी मिल न सके
वो बहुत दुर युपी में थी और अनुराग बिहार में थे।
©anuragrahi