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नजर

नजर तो हटाओ मेरे चेहरे से
गड रही है मेरे बदन पे तुम्हारी नजरें
खुदा ने तुमको नवाजा है जिस नीयत से
उसका ये अंजाम किसी पर गाज न हो
ये राज है नूर को खामोशी से छूने का
बदनीयती इसे कटघरे में ले आती है
©abhidilse