A abhidilse en July 23, 2025 नजर नजर तो हटाओ मेरे चेहरे सेगड रही है मेरे बदन पे तुम्हारी नजरेंखुदा ने तुमको नवाजा है जिस नीयत सेउसका ये अंजाम किसी पर गाज न होये राज है नूर को खामोशी से छूने काबदनीयती इसे कटघरे में ले आती है©abhidilse