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नजर आया

मुद्दतो बाद फिर कोई नजर आया है
ना जाने अब किस, किस के लिए आया है ।
दिलो को उसने खिलौनों का बाजार बनाया है ,
ऐ ,मुसाफिरों
किसी की भोली भाली मासूमियत पे मत आना ,
इसी मासूमियत ने आज तक रुलाया है ।
©sandeepgup