किसी ने ऐसे नज़र उतरी
जैसे पारी हो कोई आसमान से उतारी
एक पल को नज़र भी नज़र
झुकाएं सामने खड़ी हो
तुम्हारी
वो नज़र का टीका ऐसी जगह
लगाया हमने तुम्हारे जिस्म में
जिस जगह नज़र भी पहुंची तुम्हारी
नज़र तुम्हारी भी एक पल ठहरी
होगी
सांस एक गहरी तुमने भी ली होगी
जब हमारी ही पहली नज़र
ने तुम्हारी नज़र उतारी
वो नज़र का टीका दो जगह तुम्हारे
जिस्म पर ऐसे लगाया ऐसे
जैसे खुद नजर नज़र उतार
रही ही जैसे
तुम्हारे जिस्म पर जब हाथ
हमने लगाया था
दिल उस वक्त बहुत अकुचाया था
क्या उस पल तुम्हारा दिल भी घबराया
था
जब हमने तुम्हे नज़र का टीका लगाया था
©deepakshar
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