नजर में नहीं वो कुछ,तो बात क्यों किए जाए
गैरों को भला अब खत क्यों लिखे जाए।
हमने उनसे पूछा है,आप क्या मेरे साहिल हैं
गर नहीं तो फिर वहां क्यों कश्ती खड़ी किए जाए।
वो आंधी का झोंका है,हो सके कहीं उड़ा ले मुझे
जानकर ये सब रूख उस तरफ क्यों रखें जाए।
फालुदा समझ गुनाहों को यहां लोग गटक जातें हैं
खुदा के बंदो से गुजारिश है नेकियां उतार दिए जाए।
कल तक तो थे दोस्त अपने,पाले बदल दिए उसने
मेरी राय में उनके लिए अब नम्बर बदल दिए जाए।
आप भी देवेन्द्र,रिंकू और बिनोद आ जाएंगे इस खाने में
कुछ तो अब अनुराग से जुस्तजू किए जाए खत भी लिखे जाए।
©anuragrahi
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