नज़रें मिली तो नज़रें झुकाना पड़ा
कभी साथ रहते थे ये जताना पड़ा
उसने अब इन आंखों को पढ़ना छोड़ दिया
इसलिए अब हमें उनसे शर्माना पड़ा
जब आप आएंगे हम यहां नहीं होंगे
इशारें-इशारों में हालात उन्हें बताना पड़ा
बहुत मायुस हुआ जब मैं घर लौटा
आज़ फिर फिजुल में हमसुखन सुनाना पड़ा
क्या करें उसके सिने में दिल ही नहीं
जिसके लिए इस दिल को बार-बार रूलाना पड़ा।
©anuragrahi
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