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" नजरिया "

ईश्वर की ओर निहार कर
अंतर्मन को सुधार कर
तू अपने मन में सत्कार भर
हृदय के अल्फाज का ,
आंखों से एतबार कर
सुकून की तलाश में ,
हर सीमाओं को पार कर
हर पल में छिपी अच्छाई का ,
सच्चाई से दुल्हार कर
ईश्वर के आलिंगन को ,महसूस करने का प्रयास कर
हर क्षण बिखरती खुशियों को तू अपनी ओर पुकार कर
और अपने ही नजरिए से मुस्कुराते साम्राज्य से एकाकार कर मिथ्या भोगों से परे उठ कर
भीतर में अपने ईश्वर का संचार कर
तू ईश्वर का संचार कर ....
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