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नम़ आंखों से तुझे देखा नहीं जाता

नम़ आंखों से तुझे देखा नहीं जाता

नम़ आंखों से तुझे देखा नहीं जाता

क्या करें अब खुलकर हमसे रोया नहीं जाता

जब से गई हो,घर में समान बिखरा पड़ा है

तन्हा अब हमसे घर संजोया नहीं जाता

तुम मेरे पास हो,पहले मैं भुल जाता था अक्सर

अब तेरी यादें भी दिल से खोया नहीं जाता

देर रात तक फलक में देखने की लत लग गई है मुझे

बिन देखे तेरा अक्स रातों को सोया नहीं जाता

आज़ बहुत लग चुकें हैं दाग़ अनुराग के दामन पर

अब किसी भी गवाही से ये दाग़ धोया नहीं जाता।