एक दिन नन्हा परिंदा
मेहमान बन कर आया था।
संग अपने हजारों
खुशियां लेकर आया था।
अपनी नटखट शरारतों से
सबका दिल बहलाने आया था।
इसीलिए सबने उसको
मिट्ठू कह के बुलाया था।
हर रोज अपने पंखों को फैला
उड़ने की कोशिश करता था।
लेकिन उसकी यह कोशिश
इक दिन नाकाम हो जाएगी
वो ये खुद भी समझ ना पाया था।
खेल-खेल में उड़ने की कोशिश में
वो पंखे से जा टकराया था।
वह नन्हा परिंदा बेजुबान था
इसीलिए कुछ कह नहीं पाया था।
दर्द बहुत था उसको लेकिन
किसी को कुछ बता नहीं पाया था
बहुत कुछ कहना चाहता था
अपनों से
लेकिन वक्त ने उसे बहुत रुलाया था।
शायद अब वह वेदना वो सह नहीं पाया था।
इसीलिए वह ऊपर से भी मुरझाया था।
तभी अब उसने सब से विदा लेने की ठानी थी।
आज वह रात उसके लिए बहुत भारी थी।
क्योंकि अब उसकी अपनों से दूर होने की बारी थी।
नहीं पता था कि वह ऐसा दर्द दे जाएगा
अब वह परिंदा हम सबको बहुत याद आएगा।
©maahisingh
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