पड़ने लगे उस ज़मीन पर कदम
वो निशान छाप बनने लगे
आशाओं ने सफर शुरू कर दिया
कि अमर हो जाएं अब ये निशान
आगे बढ़े तो दुनिया बदलने सी लगी
बदलने लगी अमर होने की परिभाषा भी
खुद को खोना सा शुरू कर दिया
आशाओं ने अब रास्ता कोई और चुन लिया
रुकने लगा अब सब कुछ
बस दुनिया चली जा रही थी
और इन कदमों की धड़कन ज़िंदा थी
अब बहुत आगे निकल आए
पीछे मुड़कर देखा तो पाया
कि इक छाप के लिए
निशान कदम के बहुत हो गए
सिर्फ जीने की तलाश में
हम मर मर के ही अमर हो गए
©yash.more
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