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नसीब

कांटों पर चलना सीखा है, ठोकरों ने गिराया है,
नसीब ने मेरे एक बार, फिर मुझको हराया है,
कब तक रोकेंगी ये आंधियां, मुझको रोशन होने से,
हमने तो हुनर से अपने, सूरज को जलना सिखाया है,
हाथों की रेखाओं पर ऐतबार, हम नहीं करते,
हमने तो मेहनत की रबड़ से इन रेखाओं को मिटाया है,
जीवन एक संघर्ष है, और हमे यह स्वीकार है,
हमेशा मुस्कुरा कर हमने, चुनौतियों से हाथ मिलाया है,
आज नहीं तो कल सही, मंजिल अपने कदमों में होगी,
हमने जब जब जो ठाना है, वो करके दिखाया है।।
©mukulgarg