सुना कि तुम्हारी नसीहतों ने कइयों की दुनिया बदल दी
इसी गलतफहमी में हम भी तुम्हारे मेहमान हो गयें
थोड़ी जरूरत तो हमें भी थी तुम्हारे नसीहत की,
जब तलक हमारी अर्जी आती,तुम्हारे यहाँ शाम हो गयी ।
गौरव राव
©gauravrao
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