अभी उठी कोई बात है ,
दरिंदगी का राज है......
सब जूटे है इंसाफ दिलाने उसे ,
पर कई लड़कियों की ये बात है....
धाराए लगाई है सरकार ने कई पर यहाँ कौनसी?
इंसानियत की ये बात है......
कानून बने ऐसा कि,
कोई ये ना कहे कब कि ये बात है.....
फैसला सुनाते हैं उसे पर धीमी बहुत रफतार है....
सजा उस लड़की से पूछना जिसने सहे कई अत्याचार है...
घाव है जो उसके शरीर पर उनकी सन्ख्या में अन्नत घात है...
यही सन्ख्या उस पर हो जिसने किया ये दुष्पाप है ....
प्यासा हो चुका वो इस कदर की जिस्म ही उसकी प्यास है...
क्या यही कलयुग का सन्सार है......
©myemotions
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