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पापा

जब अपने गमों को समेटकर एक कोने मे मैं बैठ जाती हूं,
अक्सर पापा के सामने उन गमों के बारे में मैं बोल आती हूं,
मेरी छोटी सी मुस्कान पाने के लिए वो मेरे कितना समझाते हैं ।
वो मेरे गमों को अपना गम बताते हैं,
सच कहूं तो पापा मेरे बिना कुछ कहे सब गम सह जाते हैं,
वो मेरी मुसीबतों में अक्सर ढाल बनकर आते हैं,
मेरी छोटी सी मुस्कान पाने के लिए वो अक्सर बेवजह मुस्कुराते हैं,
मेरी छोटी छोटी जरूरतों को अक्सर पूरा कर जाते है,
वो पापा है मेरी बिना कुछ कहे मेरी सभी बातों को अक्सर समझ जाते है,
सच कहूं तो वो पापा हैं मेरे ,
बिना कुछ कहें सब गम सह जाते हैं,
सब गम सह जाते हैं।।
©kajalsingh