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पास रह कर भी है दुर क्या आलम है।

पास रह कर भी है दुर क्या आलम है
तुम भी तुम हो हम भी हम है।
तेरे ये याद और तेरे ही ये ग़म है
जिंदा रहने के लिए क्या ये कम है।
लेकर साथ मुझे भी तुम कहीं जाना
ये दुनिया बहुत ही बेरहम है।
सुख गए हैं आंसू इन आंखों के अब
लगता है बदन में बचा पानी कम है।
बांध दो पट्टी नासूर बनी इन ज़ख्मों पर
तुम्हारे पास ही असरदार मरहम है।
जिंदगी तो नहीं अनुराग अब कहीं
चारों ओर फकत जिंदगी का मातम है।
©anuragrahi