S

पैमाना निगाह-ए-यार की हिला के पी गया।

पैमाना निगाह-ए-यार की हिला के पी गया
शोखियों में शराब को थोड़ा मिला के पी गया।
शबाब-ए-हुस्न के लिए करते रहे इंतजार
तेरे लबों की लाली को होंठ सटा के पी गया।
आशिकों का दिल तो होता है सरफराज-ए-इश्क
हमने तो जुल्फ-ए-यार की लहरा के पी गया।
पिता बग़ैर इज्न के ये क्या थी मेरी मजाल
बस हमने चश्म-ए-यार की शेह पा के पी गया।
ऐ रहमत-ए-खुदा,कर दे मेरी हर खता मुआफ
मैं आगोश-ए-शौक में घबरा के पी गया।
ग़म-ए-तन्हाई जब अनुराग को फिर याद आने लगी
इकरार-ए-एतबार को मैं ठुकरा के पी गया।
©anuragrahi