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papa

काच कि तरह चुभते है मेरे आशु मेरी आखों में कि ...घर के किसी कोने में फिर से वहीं तनहाई है.... आज फ़िर से लौट कर उंगली थाम लो ना पापा आज फ़िर से तेरी बेटी लड़खड़ाई है ....
©Anisha Pra