जब भी पहाड़ों पर जाते हैं और वहां की हवा को चेहरे पर स्पर्श कराते हैं....
तो भीतर की दुनिया में बादल छा जाते हैं और हमें वो गहराई तक गीलेपन की शीतलता में डूबा जाते हैं....
वहां की सुंदरता रूपी बूंदे भीतर में बरस कर हमारी बंजर भूमि को उपजाऊ कर जाते हैं...
जाने कैसे पहाड़ों की सैर में हम सबसे गैर हो जाते हैं...
वहां की चट्टाने हमें भीतर में मजबूती का पाठ पढ़ाती है हवा के झोंके आगे बढ़ने की प्रेरणा दे जाते हैं....
पहाड़ों की दुनिया में चलते चलते हम खुद की ही खोज कर जाते हैं....
और आंखों की किताब में दृश्य छाप कर नीचे उतर जाते हैं....
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