पहाड़ रुपी पिता
पहाड़ रुपी पिता से एक गहन सा नाता है
जिनके सानिध्य में हृदय में जैसे सुकून भर जाता है
विचारों का युद्ध शांत हो जाता है
सांसों के मार्ग से भीतर में आनंद भर जाता है
उनकी दृढ़ता में समायी मृदुता का आभास हो जाता है
उन पर ठहर कर हृदय ईश्वर की महर को समझ पाता है
उनके स्पर्श को महसूस कर ,
हमें अपने आधार का अनुभव हो जाता है
उनकी स्थिरता से हृदय अधीरता से बाहर आ जाता है
और सुकून के बादलों सा हल्कापन पाता है।।
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