तेरे मेरे उम्र में बस इतना सा फासला
मैं हूं रात ओर तू दिन का उजाला
कभी दोनों साथ ना रह सके
मगर दोनों का एक दूजे के बिना भी ना गुजारा
तेरे मेरे उम्र में बस इतना सा फासला
मैं हूं पतझड़ तू मौसम बहार का
मैं हूं तपती धूप तू बारिश की बूदें
मगर तेरे मेरे साथ का मेल भी है नामुमकिन
पर एक के बाद दूजे का आगमन भी है ज़रूरी
तेरे मेरे उम्र में बस इतना सा फासला
मैं हूं चांदनी तू सूरज की धूप
मैं हूं रागनी तू मधुर संगीत
मैं हूं चाशनी तो तू पूरी मिठास
तेरे मेरे संगम की ना कोई है आस
फिर भी तुझे मैं ओर मुझे तू पूर्ण बनाते
तेरे मेरे उम्र में बस इतना सा ही फासला।।
©anvisha
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