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पहचान

कुछ आफताब होते है
कुछ अफसाने होते है
कुछ अपने ही अपनों से खफा होते है

जिंदगी तो एक खुला चौराहा है
ना कोई चौकीदार है ना कोई पुलिस
ख्वाहिश तुम्हारी है कदम बढ़ाने की
जो तुम खुद से देख ना सकते तो
रास्ता मै दिखाती अपनी आंखो से
गर भगवान का वरदान मिला है तुमको
तो अपनी शक्ति प्रदर्शन क्यों नहीं करते
उठो ! जागो आखिर कब तक
शांत से पड़े रहोगे इस धारा में
कहीं ये प्रवाह तुम्हे खुद ही ना
उठाकर कहीं दूर फेंक दे
कहीं देर ना हो जाए
इससे पहले अपनी जिम्मेदारी
खुद से ही थाम लो।
©anusingh