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पहेली

हां वो hairband जो छुपा लिया था मैंने,
रख रखा है संभाल कर पर
अब वो किसी काम के नही मेरे,
अब में मुक्त होना चाहता हूं ,
तुम्हारे प्रेंम से, अनुराग से,
काट देना चाहता हूँ वो पर्णयसूत्र,
जीना चाहता हूं एक बैरागी सा,
भूलना चाहता हूँ तुम्हारी
हर गलती , तुम्हारा आना
तुम्हारा बार बार ये कहना
की मैं हस्ता हूँ तो अच्छा लगता हूँ
डालना चाहता हूँ पर्दा उस बेवफाई पे,
क्योंकि जीना चाहता हूं अब
तुम्हारे बिना,
उस पागल के जैसे
जिसके लिए ना दुख
ना सुख मायने रखता है,
अब बनना चाहता हु खुद
एक पहेली,
जिसका जबाब सिर्फ तुम हो।
©saurabh15