वो एक पहेली सी थी,
जीवन मे उसका आना
समझ आने ही लगा था कि
वो रुक्सत हो गयी।
अपने साथ ले गयी
मेरी पहचान, मेरी मुस्कान
वही कहती थी
मेरी तबस्सुम अलग सी है,
मगर अब मौन हूँ
शिथिल हो चुका हूं,
भूल चुका हूँ पुराने नगमे,
जो गुनगुनाता था,
तुम्हारी आँखों मे आंखे डालकर
बोल देता था मेरे मन की बाते,
अब आंखों में आँसू के सिवा कुछ नही,
दिखता है ढूंढ़ला सा सब कुछ,
तुम्हारी पुरानी फ़ोटो,तुम्हरा वो हेयर-बैंड
हां वो hairband जो छुपा लिया था मैंने,
रख रखा है संभाल कर पर
अब वो किसी काम के नही मेरे,
अब मैं मुक्त होना चाहता हूं ,
तुम्हारे प्रेम से,उस अनुराग से,
काट देना चाहता हूं उस प्रणेयसूत्र को,
जीना चाहता हूं एक बैरागी सा,
समझ रहा हूँ तुम्हारे जाने का कारण,
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©saurabh15
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