ना जाने क्यों ?पंछी पिंजरा नहीं चाहती । भूख उसकी पिंजरे मिट जाती है ,दुनिया का सुख उसको पिजरे मिल जाता है ।प्यार भरपूर मिल जाता है ।
दुलारी वह घर की बन जाती
फिर भी ना जाने क्यों ?पक्षी या नहीं चाहती है । पि़जरे के रिक्तो से दुनिया भी नजर आता है ।
पिजरे में हवा भी भरपूर आता है ।
घोसले का उसको कोई आश नहीं होता, बदलते मौसम को हताश नहीं होता। फिर भी ना जाने क्यों ? पक्षी पिंजरा नहीं चाहती ।
©vibhasingh
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