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पहले से अब संभल गया हूं मैं।

पहले से अब संभल गया हूं मैं
कुछ न कुछ तो जरूर बदल गया हूं मैं
तुम्हें नहीं आना है मत आओ
खुद से ही अब बहल गया हूं मैं
जोखिम बहुत है दिल्लगी में
मुहब्बत के नाम से दहल गया हूं मैं
शायद जुदाई का असर कुछ हो जाए
पी तो कई प्याले गरल गया हूं मैं
मेरे बाद बदलाव तुझमें भी आएगी
तेरे जिंदगी में कर इस क़दर दख़ल गया हूं मैं।

©anuragrahi