मेरे अरमां मेरे सपने बहुत बड़े है भले,
खींच गई है आज मगर जमीं पाँव तले।
वो शख्स मेरा ईमान मेरा रहनुमा था कभी,
नहीं मिल रहा है वो दिल से अब मेरे गले।
रूठने से उसके तो आंखों में मेरी नूर न रही,
चेहरे की झुर्रियां लौट आई रौनकें चली गई।
अब इस गम के ताबीज पर मशवरा कौन करे,
जले जवाहरात, तहरीर या फिर कोई दिल जले।
©anuragrahi
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