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फूल न हो तो.....

फूल न हो तो भवरो का क्या काम
बिन बरसात मयूरी भी हो जाती उदास
कैसा सावन जिसमे ना हो बरसात
रूठे ही क्यों जब कोई मनाने नहीं आता हैं 
लाख दर्द के बिच भी मुस्कुराना सीखा हमने
फिर कभी इश्क़ नहीं करने का कसम खाया हमने
रूठना  हमे भी आता हैं
लेकिन मनाने कहा कोई आता हैं
काश होता कोई राहो में साथ निभाता
रूठने से पहले ही हमे मनाता
करते कुर्बान पूरी जिंदगी उस पर
काश कोई तो प्यार लुटाती हम पर
कहने से पहले ही समझ जाती
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©vikasgarg