V

पिता

गर्म रेत पर चल कर खुद बच्चों को फूलों पर चलाता है पिता,
खुद पत्थर की ठोकर खाकर बच्चों को बचाता है पिता,
बारिश में छतरी देकर बच्चे को, खुद भीग जाता है पिता,
पानी में डूबकर बच्चों को कंधे पर उठाता है पिता,
गम की तलवार पर चलकर बच्चों को खुशी दिलाता है पिता,
बहती नदी में कश्ती बन जाता है पिता,
जलते अंगारों पर फूल बनकर बिखर जाता है पिता,
पसीना बहाकर खुद बच्चों को अमृत दिलाता है पिता,
जीवन को सौंदर्य दिखलाता है पिता,
गर्मी में सावन की बौछार है पिता,
असाधारण व्यक्तित्व का मालिक होता है पिता
विकास गर्ग
©vicky