मेरे प्यारे बच्चों,
मेरा आशीष है कि भगवान आप सभी को खुश रखे।
न जाने क्यों मैं महसुस कर पाता हूं कि आप सभी अपने माँ के ब्रेन हैम्रेज का जिम्मेवार मुझे मानते हैं,आप सभी का ये मानना कुछ हद तक सही भी है क्योंकि मैं अपने पत्नी को उनका हक कभी नहीं दे पाया,उनके प्रति मेरा रवैया आप सभी का देखा है जो शायद इसी कारण से आपलोगों का आरोप लगाना सही भी है, मगर ये भी सच है कि मै उन्हें बहुत प्यार करता था अपनेपन का जिद्दी हक भी जता देता था मगर मैं दिल से प्यार करता था। मैंने उनके सपनों को साकार करने के लिए भरसक कोशिश की है कि आपलोगों को भविष्य में तकलीफ न हो। मुझे नहीं मालूम कि मेरे इन कोशिशों का तरीका आप सभी को पसंद आया या नहीं,मगर मैं खुद को बेचकर भी बच्चों के भविष्य को बनाने वाले तर्क पर विश्वास करता हूं। हम दम्पति के सपनों को साकार करने के लिए मेरे पास पर्याप्त आमदनी नहीं थी, व्यापार भी लगातार घाटे में जा रहें थे, ऐसे में मेरे हिस्से की अचल संपत्ति को बेचने के अलावा कोई और चारा नहीं था। मैं जानता हूं कि बाद में मेरे उपर बहुत उंगलियां उठेंगी। मगर किसी के जनाजे की कसम थी मुझे जो मैं चाह कर भी खुदकुशी नहीं कर सकता था। मगर मैं अपने कर्मों से कभी मुह नहीं मोड़ा बस नसीब ने साथ नहीं दिया। मेरी लगातार असफलताएं आपलोगों के मन में घर कर गई और मुझे उसी नजर से देखने लगे। मैं एक अच्छा पिता बनना चाहा लेकिन नहीं बन सका मैं आपलोगों की आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सका,मुझे आप सभी से कोई शिकायत नहीं बस एक अनुरोध है कि मैं आपलोगों के लिए कोई चल या अचल संपत्ति नहीं दे सका इसलिए मेरे मरने के बाद मेरे लिए शोक सभा का आयोजन नहीं करेंगे। मेरा जन्म दिन और मेरे मुक्ति का दिन भी समान ही होगा। जब आप सभी को सफल देख लुंगा उस वर्ष के आने वाले जन्म दिवस के दिन ही मेरा अंत होगा। मैं इस धरती पर बोझ हूं मैं नहीं चाहता कि कोई मेरा जन्म दिन पर खुशी और परायण दिवस पर शोक मनाए। इसलिए मैं अपने जन्म दिवस को ही मृत्यु दिवस बनाने को चुना है ताकि कोई खुशी या शोक न मना सके क्योंकि मैं इन दोनों में से किसी के लायक नहीं हूं।
भगवान आप लोगों को खुश रखे और मेरे पैतृक ऋण से आप सभी को मुक्त करे।
©anuragrahi
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