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Poetry in kind of story

आज पहली बार माँ की कमी महसूस हुई,
जो कभी रातको नींद ना आने पर बहोत बातें कराती थी.
और अब,
इस भागदौड़ सी ज़िन्दगी मे पता नहीं वो दिन कहा गए,
खुद को संभालते मानो थक से गए है,
जिंदगी चल तो रही है, लेकिन वैसे नहीं जैसे पहले चलती थी,.
याद है वो दिन जब बीमार होने पर सब छोड़ के सेवा के लिए होते थे सब.,
और अब,
बीमार हो भी तो भी ना होने ka दिखावा करना पड़ता है,.
आ तो गए कुछ करने, लेकिन कुछ करते करते मानो थक से गए,.
आता है याद सब, क्या करे? !
ऐसे ही जीना पड़ता है अब !!!
©shivanivar