अपनी ही धुन में जाये जा रहा हूं...
मुसाफिरों में पहचान बनाए जा रहा हूं...
राहो को हमराही बनाए जा रहा हूं...
लहरों के साथ खुद को बहाए जा रहा हूं..
जज्बातों के समंदर में डुबकियां लगाए जा रहा हूं...
खुशियों के पौधे भीतर में उगाए जा रहा हूं...
मुस्कुराकर बढ़ जाता हूं आगे और हर दिन खुद को सँवारे जा रहा हूं...
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